Elections {5 states}

There were the elections today of first round for the state Chhattisgarh.

The major achievement that the elections were at the naxal belts, nd there were no violence at all…

The great use of the mind from all the civilians that they participated in the elections as it’s the right of any citizen to cast the vote… Nd the voting percentage crossed the level of 60%…

This is the great thing…

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Miss you❤

Unreachable far you

I miss you

Talked to you in the morning

And in the evening itself

My heart says

I miss you !

Your presence matters

Your absence matters more

My piece of peaceful mind

My piece of hopeful heart

You….

I miss you!

My temporary or

May be my permanent

Piece of soul

You

I miss you …❤

Yours loving warrior

Naina

नामकरण

शहरों के नामों को लेकर

बड़ी अफ़रा तफ़री है आजकल

फ़ोन करके योगीजी को प्रति सुबह

पूछने लगा है अब तो गूगल (Google) ।।

 

कि साहब, नाम वैसे ही रहने दें

या है आज कोई आपकी नई पहल।

इतनी समस्याएँ लिए फ़िरते हो

नहीं मिला क्या आज तलक कोई हल ।।

फ़ोन करके योगीजी को प्रति सुबह

पूछता यही है अब तो गूगल…

 

सबने मिल कर एक साथ

शायद इसी लिए खिलाया था कमल

होते तो शायद आज वे भी करते विस्मय

नाम था जिनका पटल – अटल ।।

फ़ोन करके योगी जी को प्रति सुबह,

अवश्य यही कहता होगा गूगल…

 

पटल =  पटेल {लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल}

अटल = अटल बिहारी बाजपेयी जी

सभी शहरों, स्मारकों के नाम बदलना, विकास कार्यों से भी ज्यादा ज़रूरी है शायद…

सजदा

हो के शर्मिन्दा गुनाहों से,

कभी

सर को झुका तो सही..

ये करेगा माफ़ तुझे,

दो अश्क़
बहा तो सही..

न रहेगा
तू मोहताज कभी किसी का,
अरे नादान

अपने हाथ उठा के
दामन फैला तो सही…

8 नवम्बर

यूँ तो नवम्बर 8

होता है जन्मदिन आडवाणी साहब का

पर इस तथा कथित चौकीदार ने

मान सम्मान सब छीन लिया आडवाणी साहब का।।

 

इतने पाक ख़ास दिन को

कर दिया पूरा काला

छीन तो लिया सब मान उनका

और छीन लिया निवाला ।।

कि इतने पाक जन्म वाले दिन को

कर दिया क्यूँ काला…

 

लोगों को तो याद आती है नानी

इनको याद दिला दी खाला।।

के इतने पाक साफ़ दिन को

कर दिया क्यूँ काला…

 

# इनकी बढ़ोत्तरी और तरक्की में

जैसे जड़ दिया इक बहुत बड़ा ताला

के इतने पाक साफ़ दिन को

कर दिया क्यूँ काला…

 

# लोगों के तो पैरों में हैं पड़ता,

पर इनके तो मुँह में पड़ा दिया छाला,

के इतने पाक साफ़ दिन को

कर दिया क्यूँ काला…

 

# लोगों के दिल ओ दिमाग से

जैसे निकाल दिया जाला

के इतने खास खास दिन को

कर दिया क्यूँ काला…

 

लोग तो हैं छोटा गड्ढा खोदते

आपने तो खोद दिया बहुत बड़ा नाला

के इतने पाक ओ खास दिन को

कर दिया क्यों काला…

 

यूँ तो होते हैं मुर्गे हलाल

पर इनका तो कर दिया हलाला।

के इतने पाक ओ ख़ास दिन को

कर दिया क्यूँ काला…

 

नोटबंदी जिस दिन करी गई, वो दिन था नवंबर 8 2016 जो एक राष्ट्रीय दल की नींव रखने वाले, भीष्म पितामह माने जाने वाले आदरणीय लालकृष्ण जी आडवाणी का जन्मदिवस भी है,

अतः ऐसे ख़ास व्यक्ति के जन्म वाले दिन को नोटबंदी जैसी विध्वंसक घोषणा के लिए चुना जाना हैरान करता है, और साहब (स्वघोषित ‘देश के चौकीदार’) की नीयत पर भी कई सवाल उठाता है…

दो साल (नोटबंदी के)

लो जनाब, अब तो हो चले

नोटबंदी को पूरे दो साल

हो गया देश और अर्थव्यवस्था

का बुरे से भी बुरा हाल।।

 

ये हम नहीं कहते

कहे हैं समाचार सारे अब

कहे हैं ‘उर्जित’ भी अब भरी ऊर्जा से

बजा के घन्टे, ठोक के ताल ।।

 

# एक ही झटके में

जैसे मुर्गे को किया जाता है हलाल

साहब ने छीन लिया सब कुछ

और कर दिया कंगाल।।

 

# कोई समझ ही न पाया था तब

उस छलिये की ये चाल

ले ली उसने सभी की जमा पूंजी

ले लिया सारा जमा माल।।

 

# ऐसा बिछाया उसने

अपनी माया का ये जाल

कि हो गये ढेर सभी

जो कहलाते थे गुदड़ी के लाल।।

 

# राजन साहब कहते ही रहे

इस निर्णय को दो अभी टाल

मगर ये तो टूट पड़े उन्हीं पे

बन के महा…काल ।।

 

# क्या व्यापारी क्या किसान

मजदूर भी  हुए बदहाल।

घर की गृहणी की भी साहब

 गल नहीं रही  अब दाल ।।

 

# नहीं बख्शा किसी को भी,

उधेड़ दी इसने सबकी खाल ।

जो थोड़े बच गये थे तब,

पिचक गये अब उनके भी गाल ।।

 

नोटबंदी से जनमानस को हुई असहाय पीड़ा और अपूर्ण क्षति को शब्दों में बाँधने का एक तुच्छ सा प्रयास…

Apnapan !

‘Apnapan’ ek dhokha tha,

Bachpan se kisi ne parosa tha,

Ankhoon ki dhool

Mano ab ja k saaf hui hai..

Hakikat se mano ab mulakat Hui hai

Der se hi sahin

Shukra hai

asliyat se hamari baat hui hai

Saaf dil ne haamare

ab duniyaadari sikh li hai

Kale dil wali meethi batato se bhi

Bahot hameinn sikh mili hai

‘Apnapan’ jo kabhi tha hi nai

‘Apnapan’ jo ek bhram tha

Humne Bas vahi khoya hai

Badnaseeb hum nahi

Qki jo kabhi tha hi nahi

humne bas vahi khoya hai

Badnaseeb vo hain jiinhone

Hamare sache visvaas ko khoya hai

Dil k kareeb rakha tha jise

Badnaseeb vo hain jinhone

Hamare apnepan ko khoya hai

Darpan se dhool poch

Ab hamne bhi dikhavati Logo se

dikhava karna sikh liya hai

‘Apnepan’ ka dhokha

Hamne bhi parosna sikh liya hai

Happy Reading!

Yours loving warrior

Naina