चिराग़ कयी झिलमिलाएँगे 

मैं शाम अक्सर हारे बैठ जाता हूँ सुबह की तलाश में।
मैं रोज़ जाम कयी ख़त्म कर जाता हूँ, एक अनजानी सी प्यास में। 
हूँ मुख़ातिब हर बुराई से जहाँ की पर मयस्सर मैं हो जाता हूँ अच्छाई के ख़्वाब से।

यूँ तो हूँ शांत एक बूझी हुई लौ के धूँए सा मैं इस अंधेरे में,

पर चिराग़ कयी मैं जलाता हूँ, उस उजले आफ़ताब के लौट आने की आस में। 

ग़लत हूँ जगहों पर, पर अड़ जाता हूँ, सच्चाई के साथ में, 

मैं कोशिश सच की करता पर झूट अनगिनत कह जाता, एक मुस्कुराहट की ताक में। 

दरिंदगी से वाक़िफ़ हूँ अपनी, पर न्योछावर सब कर दूँगा नेकी की राह में 

मैं बंदगी नहीं करूँगा तेरी, पर सब छोड़ आना है मुझे, तुझे हासिल करने की राह में।
पर हाँ चिराग़ कयी झिलमिलाएँगे उस आफ़ताब के लौट आने की चाह में। 

रजत. (Itzwhisperer)

With great usage of tough words you express everything with simplicity that both layman and a well read man can get attracted to your writing…Rajat(whisperer)!

Us aftabh ke laut aane ki raah mein chiraag kai jhilmilayenge..

Awesome!

This is how inspiration must be taken.This is how pain should be handled and yes every pain can be handled afterall we are managable creatures(Remember huMan beings) 

Even unfulfilled dream makes you to help everyone else to fulfil their dream.

Galat ho jau kai jagah par

Ya bujhi hui lao kyu na ban jau

If you keep ‘right attitude’ and ‘courage’

Cent percent chirag kai jhilmilayenge!

Keep scribling rajat!

I had awesome time reding this!

Happy reading readers!

Yours loving warrior

Naina

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शहर है मेरा भी 

मैं बूझते उजाले की लौ बन बैठूँगा मैं तेरी वादियों की तनहैयाँ दूर तक समेटूँगा। 
कल गर क़ाबिल हुआ तो ही वापिस लौटूँगा

तेरा ज़र्रा समेटे जिंदिगी की दौड़ दौड़ूँगा। 
चाहे क़ाबिज़ जहाँ हो जाऊँ आशियाँना तू होगा, 

मकान चाहे जहाँ बनाऊँ मेरा घर तू होगा। 
रंग चाहे जहाँ का चढ़ाऊँ मिट्टी मेरी तू होगा, 

कल वापिस भले ना आऊँ मुझमें ज़िंदा तू होगा। 
चल मेरी कामयाबी की अब दुआ कर मेरे शहर

माँ के बाद तेरी ही दुआ में है वो असर। 
तू भीतर मेरे साथ, तो आसान होगा ये सफ़र

तेरे पानी की मिठास लिए पी लूँगा हर ज़हर। 
तेरी याद कुछ धूँधली जो हुई आँखे नम सी लगी, रोया नहीं मैं पर हसरत जो लौट आने की फिर से जगी। 
तेरी हवा जो साथ देगी जल्द कुछ कर दिखाऊँगा, 

मैं बाशिंदा तेरा, टूटूँगा ना किसी डर से बस जल्द. लौट आऊँगा।

-Itzwhisperer (रजत)

After reading this I am sure everyone will be reminded of their hometowns.All of us have to migrate for some reason at some point of life.

Education 

Job

Marriage (specially girls )

And many more reasons can be.

Worst one as the refugee.

But the place where you have spent your childhood remains dearer forever and has no replacement.

Awesome one Mr. Whisperer!

And welcome to our place…finally you have made your first whishper here and it is great one.

Keep scribbling whisperer!

Happy reading readers!

Yours loving warrior

NAINA