रफ़ाल

लड़ाकू विमान रफ़ाल

कर रहा सबको बेहाल,

चाहे भाजप हो या काँग्रैस

बन रहा सबके जी का जंजाल ।।

लड़ाकू विमान रफ़ाल

कर रहा बेहाल…

कभी इस दल ने बजा दिये

उस दल के नेताओं गाल,

तो कभी उस दल ने भी

खींच दी इस दल की खाल।

लड़ाकू विमान रफ़ाल

कर रहा कमाल…

कभी ओलांद का बयान दिखा

काँग्रैस लाई भूचाल,

तो अब ट्रैपियर को सामने ला

भाजप ने चली अपनी चाल ।।

लड़ाकू विमान रफ़ाल

मचा रहा धमाल…

कोई तो बड़ी कोशिश है कर रहा

पर ये क्या, गल ही नहीं रही दाल

एक ने समझा था ब्रह्मास्त्र इसे,,

मगर दूजे को अब मिली ढाल।।

वाह रे लड़ाकू विमान रफ़ाल

नित कर रहा कमाल, नित कर रहा कमाल…

ओलांद = फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति

ट्रैपियर = Eric Trappier {दसौ (Dassault),लड़ाकू विमान राफ़ेल बनाने वाली कम्पनी के CEO}

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Govt. V/s Supreme Court

Supreme court now asked the govt. to provide the necessary details about the deal of the Rafael fighter planes…

The Modi or we can say moody govt. was giving excuses nd wanting to pass the days nd days on the deal details, is now gets agree to provide the related very details about the deal after the order of the Supreme Court.

M nt just getting that what’s the reason behind all this (High Voltage Drama), as this govt tags itself a very honest nd clear govt.

As he calls himself the “Choukidaar” noone is able to get the intension behind the desicion of not telling anything about the deal.

Let’s see what will happen now…

14 नवम्बर

14 नवम्बर यूँ तो बचपन से बाल दिवस के रूप में ही मनाते आए हैं, जो चाचा नेहरू (प्रथम प्रधानमंत्री, पण्डित जवाहर लाल नेहरू जी) का जन्मदिवस है, जिसे उन्होंने बच्चों के प्रति समर्पित किया। अतः यह दिन बाल दिवस (बच्चों को समर्पित दिन) के रूप में मनाया जाने लगा।

चाचा नेहरू ने जब राष्ट्र की बागडोर संभाली तब देश में बड़ी समस्या थी भुखमरी, गरीबी और बेरोज़गारी की, क्योंकि सोने की चिड़िया माने जाने वाले भारतवर्ष को सैकड़ों वर्षों तक ग़ुलाम बना कर अंग्रेज़ों ने खोखला कर दिया था। ऐसी परिस्थिति में हिम्मत और बुद्धिमता का परिचय देते हुए चाचा नेहरू ने तमाम जनता (राष्ट्र के समस्त नागरिकों) के पालन पोषण का ज़िम्मा उठाते हुए प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।

उन्होंने सभी को (विभिन्न धर्म, समुदाय के लोगों को) जोड़ कर रखा। उन दिनों दंगे आम बात थे। ऐसे में वे स्वयम् उन दंगों वाली जगहों पर जाते, और भाईचारा स्थापित कराते। उनका यही गुण उन्हें औरों से अलग व ख़ास बनाता था।

ऐसी महान् विभूति का आज जन्मदिवस है । क्यों न आज के दिन हम भी शपथ लें कि हम भी राष्ट्र की एकता व अखण्डता का मान रखेंगे, भाईचारे की भावना से युक्त होकर सच्चे भारतीय बनेंगे, और माँ भारती का सिर गर्व से सदा ऊँचा करेंगे…।।

जय हिंद जय भारत

विधान सभा चुनाव 2018

आज, 12 नवम्बर 2018 को प्रथम चरण के लिए 12सीटों के लिए मतदान हुआ।

चुनाव आयोग की ये काफ़ी सराहनीय पहल रही, क्योंकि कुछ संवेदनशील क्षेत्र थे, तो कुछ अति संवेदनशील, किन्तु चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही। तथा मतदान का औसत प्रतिशत भी 60% से ऊपर रहा, जो पिछले समय से कुछ कम है।

मगर प्रसन्नता है कि लोग पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं क्योंकि मताधिकार का प्रयोग करना जहाँ एक ओर अधिकार की बात है, वहीं दूसरी ओर हमारी बुद्धिमता व समझदारी को भी इंगित करता है।

अतः यह एक हर्ष का विषय है…

# चुनाव आयोग का प्रयास सफ़ल व सराहनीय है।।

Elections {5 states}

There were the elections today of first round for the state Chhattisgarh.

The major achievement that the elections were at the naxal belts, nd there were no violence at all…

The great use of the mind from all the civilians that they participated in the elections as it’s the right of any citizen to cast the vote… Nd the voting percentage crossed the level of 60%…

This is the great thing…

नामकरण

शहरों के नामों को लेकर

बड़ी अफ़रा तफ़री है आजकल

फ़ोन करके योगीजी को प्रति सुबह

पूछने लगा है अब तो गूगल (Google) ।।

 

कि साहब, नाम वैसे ही रहने दें

या है आज कोई आपकी नई पहल।

इतनी समस्याएँ लिए फ़िरते हो

नहीं मिला क्या आज तलक कोई हल ।।

फ़ोन करके योगीजी को प्रति सुबह

पूछता यही है अब तो गूगल…

 

सबने मिल कर एक साथ

शायद इसी लिए खिलाया था कमल

होते तो शायद आज वे भी करते विस्मय

नाम था जिनका पटल – अटल ।।

फ़ोन करके योगी जी को प्रति सुबह,

अवश्य यही कहता होगा गूगल…

 

पटल =  पटेल {लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल}

अटल = अटल बिहारी बाजपेयी जी

सभी शहरों, स्मारकों के नाम बदलना, विकास कार्यों से भी ज्यादा ज़रूरी है शायद…

सजदा

हो के शर्मिन्दा गुनाहों से,

कभी

सर को झुका तो सही..

ये करेगा माफ़ तुझे,

दो अश्क़
बहा तो सही..

न रहेगा
तू मोहताज कभी किसी का,
अरे नादान

अपने हाथ उठा के
दामन फैला तो सही…

8 नवम्बर

यूँ तो नवम्बर 8

होता है जन्मदिन आडवाणी साहब का

पर इस तथा कथित चौकीदार ने

मान सम्मान सब छीन लिया आडवाणी साहब का।।

 

इतने पाक ख़ास दिन को

कर दिया पूरा काला

छीन तो लिया सब मान उनका

और छीन लिया निवाला ।।

कि इतने पाक जन्म वाले दिन को

कर दिया क्यूँ काला…

 

लोगों को तो याद आती है नानी

इनको याद दिला दी खाला।।

के इतने पाक साफ़ दिन को

कर दिया क्यूँ काला…

 

# इनकी बढ़ोत्तरी और तरक्की में

जैसे जड़ दिया इक बहुत बड़ा ताला

के इतने पाक साफ़ दिन को

कर दिया क्यूँ काला…

 

# लोगों के तो पैरों में हैं पड़ता,

पर इनके तो मुँह में पड़ा दिया छाला,

के इतने पाक साफ़ दिन को

कर दिया क्यूँ काला…

 

# लोगों के दिल ओ दिमाग से

जैसे निकाल दिया जाला

के इतने खास खास दिन को

कर दिया क्यूँ काला…

 

लोग तो हैं छोटा गड्ढा खोदते

आपने तो खोद दिया बहुत बड़ा नाला

के इतने पाक ओ खास दिन को

कर दिया क्यों काला…

 

यूँ तो होते हैं मुर्गे हलाल

पर इनका तो कर दिया हलाला।

के इतने पाक ओ ख़ास दिन को

कर दिया क्यूँ काला…

 

नोटबंदी जिस दिन करी गई, वो दिन था नवंबर 8 2016 जो एक राष्ट्रीय दल की नींव रखने वाले, भीष्म पितामह माने जाने वाले आदरणीय लालकृष्ण जी आडवाणी का जन्मदिवस भी है,

अतः ऐसे ख़ास व्यक्ति के जन्म वाले दिन को नोटबंदी जैसी विध्वंसक घोषणा के लिए चुना जाना हैरान करता है, और साहब (स्वघोषित ‘देश के चौकीदार’) की नीयत पर भी कई सवाल उठाता है…