संग हूँ तेरे

हो घड़ी कैसी भी,

 संग हूँ तेरे

समा हो चाहे कैसा भी

 संग हूँ तेरे..


कभी न समझना दूर मुझे तुम

रहना कभी न तुम उदास

 बस दिल से लेना पुकार मुझे तुम

 पाओगे फिर मुझे तुम अपने पास


गर कभी  जो ठोकर खाओ, 

“प्रिय मेरे” न तुम घबराओ

 सम्भाल लूँगा हर हाल में तुमको

हर संकट से लूंगा बचा मैं तुमको..



 रखना तुमको ध्यान सभी का

 तुमसे ही है मान सभी का

हो तुम ही तो प्राण सभी का

 सहेजना तुम अब ज्ञान सभी का..


दिये हैं तुमको शील सभी अब

 बनाया तुम्हें औरों से महान

सभी हैं तुम्हारी ज़िम्मेवारी

 रखना तुम्हें सभी का ध्यान..


जीवन के किसी मोड़ पे प्रिये

 ग़म के बादल जो तुमको घेरे

हर बार तुम्हारा हाथ थाम के

 चलूंगा सदा संग मैं तेरे..


थामे रखना हाथ मेरा सदा

  होंगे दूर फिर सभी हनेरे  (अंधेरे)

 जीवन के हर मोड़ पे प्रिये

 संग हूँ तेरे, संग हूँ तेरे…।।
 

जीवन के हर मोड़ पे प्रिये (स्नेही)

 ‘आशुसुधा’ संग सदा तुम्हारे

दूर न करना कभी ख़ुद से मुझे तुम

 हर साँस, हर कदम, संग हूँ तेरे, संग हूँ तेरे…!!!


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दानव 

नवंबर आठ को  इक दानव*  आया 
शुरु शुरु में खूब डराया

बड़े बड़ोंं को थोड़ा सताया

छोटों को तो वो मार के खाया..



वाह री कुदरत तेरी कैसी माया

क्या तुझे ज़रा भी मर्म न आया

 जो थोड़ा बहुत था बचा बचाया

 तूने तो वो सब निकलवाया..


 बड़ी मुुुश्कि्ल से था कुुुछ ख्वाब सजाया

हर गृहणी ने था जो थोड़ा बचाया

 तूने अपनी चतुराई  (छल) से

 उस बचत को क्या ख़ूब निकलवाया..


नेता श्री ने चीख चीख के

 मंच से क्या खूब फ़रमाया

मित्रों  50 दिन  दो  साथ मेरा

 ले आउंगा काली माया (काला धन)..


हम सबने दिया साथ उस ठग का

हर इक जन उसके जाल (बात) में आया

 और उसने  हम भोले  लोगों से

इतना बड़ा पहाड़ खुदवाया..


लच्छेदार  बातों से भाया

 वो बनकर मदारी आया

 बनाके हम सभी को बन्दर

 उसने हमें दिनरैन नचाया..


उलझा के अपनी लुभावनी बातों में

 हर शख़्स को उसने क्या ख़ूब भरमाया

 ख़ुदवाता रहा पहाड़ वो रात दिन

 अन्त में एक छोटी चुहिया निकलवाया…!!!


दानव  =  नोटबंदी

 नेता श्री  =  गरीब माँ का अमीर बेटा जो प्रति सप्ताह कई करोड़ रुपये कपड़ों पे ख़र्च करे है…

 पहाड़ =  आम जनता ने जो कष्ट सहे


छोटी चुहिया =  कुछ हाथ न आया, सब व्यर्थ ही साबित हुआ…

G S T  

 जी 0 ऐस 0 टी 0  :  एक लघुकथा
मगरमच्छो को पकड़ने   के लिए तालाब से सारा पानी निकाल दिया।
परंतु कोई मगरमच्छ नहीं मिला क्योंकि मगरमच्छ उभयचर  है वो पृथ्वी पर भी रह सकता है।
परंतु पानी के अभाव में सभी  छोटी मछलियां मर गईं…!!!

माँ “प्यारी माँँ”

जब भी कभी हम किसी संकट में होते हैं

  तो पता नहीं कैसे उसे मालूम हो जाता है

झट से फोन करती और कहती है

 बेटा, कहाँ है, कैसा है, सब ठीक तो है ना..




हर छोटा बड़ा दर्द

 हर छोटी से छोटी बात 

बिना कहे ही जान जाती है

 पूछती है, क्या हुआ, किसी से कुछ बात हो गई क्या..




  क्या जादू होता है माँ के पास 

 कि सब कुछ पहले ही जान लेती है

 इसकी खोज तो Google भी न कर पाए

 कि  माँ  कैसे सब कुछ  सहज ही जान जाए

 

माँ   

  • माँ क्या है

 माँ तू मेरी जिन्द है, तू मेरी जान है

  हर बार हर जगह मेरी  इक तू ही तो पहचान है

जो कहते हैं जहान में, सब हम ही हैं करते

शायद वो तेरे वास्तविक स्वरूप से अब तक अनजान हैं..

  1.  यूँ तो ये जहाँ है इक मुसाफ़िरख़ाना

 हर कोई यहाँ चार दिनों का ही मेहमान है

रहम कर, दे सभी को तू  नेकियाँ

 कि जगाना तुझे ही सभी का ईमान है..


  1. किसी को इल्म,किसी फ़न का बड़ा गुमान है

“मगर  मेरे लिए तो हर बार, हर कदम इक तू ही तो मेहरबान है

कभी दिया था तूने  समंदर में रास्ता   हज़रत मूसा को

“आज ये दास, ये ख़ादिम तेरा वोही दरबान है..



  3.  सुने हैं किस्से तेरे ज़र्रानवाज़ी के सभी ने

 के ख़ुद से जोड़ के इस नाचीज़ को तूने कर दिया महान है

वरना तो ऐसे झूठे भी इस जगत ने हैं देखे

 जो बनते सत्यपाल, सत्या और सत्यभान हैं..



4.   मैं क्या मांगूँ, क्या अर्ज़ करूँ मैं

  हर पल की मेरे, तुझे बराबर पहचान है

किसी को होंगे  सहारे  हज़ार बेशक

 पर मेरा तो तू ही गुज़ारा, तू ही मेरा गुज़रान है..



 5.  वाहिगुरु तू,,  है ईसा तू ही

 तू ही राम,  तू मीरा का श्याम है

हज़रत तू,  नबी है तू ही

‘तू ही मेरी इबादत,  तू मेरा ईमाम है..

 

  1.  किया रास हर कारज तूने

बनाया तूने हर बिगड़ा काम है

जितने पैग़म्बर हुए हैं अब तक

” सुनाया सभी ने इक तेरा ही तो पैग़ाम है..



7.  ‘आशुसुधा’ भी  हैं चाकर तेरे

 तुझसे  रौशन  इनका सकल जहान है

कर रहमत रखना संग सदा अपने

 तेरे सिवा मिलना कहीं न स्थान है . . .  !!!


सृष्टि का सृजन  होता है  माँ से

माँ ही होती आधार, माँ ही प्राण हैँ
 माँ से ही है पालन और रक्षण भी है माँ से

  माँ के आशीष से ही बच्चे की आन बान शान है...

किरणें  ‘आपके’ आफ़ताब की – 3

न झर रही, न झर चुकी है

पंखुड़ियाँ  इस गुुलाब की

तो क्या ज़रूरत है ऐ जानिब

इन  ‘अश्कों के सैलाब’ की..




बात बचपन में पढ़ी थी

‘सुखों के जिस तालाब’ की

हैं हमेशा संग हमारे

किरणे  ‘उस’ (आपके)  आफ़ताब की..


मिल के संग,  नित बढ़ते चलेंगे

है बात ये उनके ख्वाब की

हमेशा हैं संग हमारे

किरणें  ‘आपके’ आफ़ताब की..


होती ज़रूरत उनको नहीं कभी

किसी दिखावे,  किसी नक़ाब की

‘आशुसुधा’  संग जिनके हमेशा

किरणे  ‘आपके’  आफ़ताब की!!!

 किरणें   ‘आपके’ आफ़ताब की- 2

न झर रही, न झर चुकी हैं

 पंखुड़ियाँ   ‘इस गुलाब’ की

तो क्या ज़रूरत है   ऐ जानिब

” इन   ‘अश्कों के सैलाब’ की” 


तो क्यों फ़िकर हरसू करें हम

   हर  बात  हो   सवाब की

हैं हमेशा संग हमारे

  किरणेंं   ‘आपके’ आफ़ताब की


तो क्यों डरें और क्यों हम सहमें

क्यों  ‘गफ़लत’ में पड़ जाएँ हम

‘अश्क’  के अनमोल मोती

  व्यर्थ  क्यूँ  बहाएँ  हम


दें खुशी हर एक जन को

 वजह हम बनें मुस्कान की

आगे रखें सदा नेकियाँ  ‘उनकी’

 आखिर है बात ये ‘उनकी’  शान की


जान लो, अब बातें पढ़ लो

 ‘उनके’  दिल की  उस किताब की

हैंं  हमेशा संग हमारे

 किरणें  ‘आपके’ आफ़ताब की


“आशुसुधा”  चाहें सदा

महक  ‘आपके’  मेहताब की

हैं हमेशा संग हमारे

 किरणें  ‘आपके’ आफ़ताब की

रहें हमेशा  संग हमारे

 किरणेंं  ‘आपके’ आफ़ताब की!!!


   आपके शुभाशीष हेतु सदा प्रतीक्षित 

             –       आशुसुधा

मेरे नेह भरे “दो नैना”

है तुमसे मुझको नेह (स्नेह) बहुत

हो तुम ही मेरे नैना….

तुमसे है मुझको नेह बहुत

तुम ही मेरे  दो नैना…


तुम ही तो मेरे सब कुछ हो

हो तुम ही अब  सोना  सब गहना

है तुमपे ही सब  ज़िम्मेवारी

बस यही है तुमसे कहना….

 

है बनना तुमको ठण्डा झोंका

ख़ुश रहना   नित बहना,

जैसे उड़ते मस्त हो के  पन्छी

चिड़िया बाज़ तोता और मैना….

 

रखो खु़द पर विश्वास पूर्ण

कि सताए कभी कोई भय ना

किला सारा किया  तुम्हें सुपुर्द अब

कभी ना कहना, ना ना  मैं ना…..



हो जाते हैं उनके सभी स्वप्न साकार

आ जाता है जिन्हें सब सहना,

फिर होता है जीवन में सदा मंगल उनके

ऐसा विद्वानों – बुज़ुर्गों का है कहना……



तुमसे ही तो जीवन  मंगल  है

बस यही है तुमसे कहना,

है तुमसे मुझको  नेह  बहुत

      हो तुम ही मेरे  नैना…।।


तुमसे है मुझको नेह बहुत

   तुम ही मेरे    दो नैना . . . !!

कर दो मंगल सब  हे गोपाल (ईश्वर) अब

  यही, हाँ यही, बस यही है तुमसे कहना…..!!!

Some lines touch you so much that you become speechless….

This is such a thing for me..

Brilliant one Ashu👌

Thanks for these treasurable lines!

Happy reading readers

Yours loving warrior 

Naina


Raksha Bandhan

What is the actual meaning of Raksha Bandhan

Perhaps it means that the person to whom she is tieing the belt or Rakhi, will protect her….

 
 

  •  परन्तु क्या केवल इतने मात्र से उस तथा कथित बहन का रक्षण  सुनिश्चित हो जाता है…..

आज एक दिल दहला देने वाली खबर पढ़ी, तो कई प्रकार के सवाल मन में एक साथ उमड़ पड़े….।।।

   This is the screenshot of the very related news….
वो खबर कुछ यूँ थी कि कल {रक्षाबन्धन वाले दिन,07.08.2017 को} CRPF के जवान, जिनपर हमें गर्व होता है, और साथ ही ये विश्वास भी कि वे तत्पर हैं सदा हमारे रक्षण को…..   उनका बड़ा ही घिनौना चेहरा सामने आया हैै, जिससे मन में ये सवाल भी आने लगे कि क्या ये ही मतलब है हमारे इस राष्ट्र में रक्षा बन्धन का, रक्षा के इस वचन का……

 क्या यही काम की अपेक्षा करें हम अपनी सेना {CRPF} से….

  अब कृपया आप ही प्रकाश डालें, और मेरी व्यथा को समाप्त करें…….

      आपके उत्तर के लिए प्रतीक्षित

                           :    आशुसुधा