जनरेशन गैप…….!

हम लोग,जो 1950 से 1990

 के बीच जन्में है,

 हमें विशेष आशीर्वाद प्राप्त हैँ …

हम ना अत्याधुनिक पीढ़ी है ना अत्यन्त प्राचीन ….
….और ऐसा भी नही कि

 आधुनिक संसाधनों से 

हमें कोई परहेज है……!!!
         लेकिन…..
👍 हमें कभी भी 

जानवरों की तरह किताबों को 

बोझ की तरह ढो कर स्कूल 

नही ले जाना पड़ा ।
👌हमारें माता- पिता को

 हमारी पढाई को लेकर 

कभी अपने programs 

आगे पीछे नही करने पड़ते थे…!
👍 स्कूल के बाद हम 

देर सूरज डूबने तक खेलते थे   
👍 हम अपने 

real दोस्तों के साथ खेलते थे; 

net फ्रेंड्स के साथ नही ।

👍 जब भी हम प्यासे होते थे 

तो नल से पानी पीना 

safe होता था और 

हमने कभी mineral water bottle को नही ढूँढा । 

👍 हम कभी भी चार लोग 

गन्ने का जूस उसी गिलास से ही

पी करके भी बीमार नही पड़े ।

👍 हम एक प्लेट मिठाई 

और चावल रोज़ खाकर भी 

मोटे नही हुए ।

👍 नंगे पैर घूमने के बाद भी

 हमारे पैरों को कुछ नही होता था ।

👍 हमें healthy रहने 

के लिए Supplements नही 

लेने पड़ते थे ।
👍 हम कभी कभी अपने खिलोने 

खुद बना कर भी खेलते थे ।
👍 हम ज्यादातर अपने parents के साथ या grand- parents के पास ही रहे ।

👌हम अक्सर 4/6 भाई बहन 

एक जैसे कपड़े पहनना 

शान समझते थे…..

common. वाली नही 

एकतावाली feelings …

enjoy करते थे……!

👍 हम डॉक्टर के पास 

नहीं जाते थे, 

पर डॉक्टर हमारे पास आते थे 

हमारे ज़्यादा बीमार होने पर ।

👍 हमारे पास 

न तो Mobile, DVD’s, 

PlayStation, Xboxes, 

PC, Internet, chatting,

क्योंकि 

हमारे पास real दोस्त थे ।

👍 हम दोस्तों के घर

 बिना बताये जाकर 

मजे करते थे और 

उनके साथ खाने के 

मजे लेते थे। 

कभी उन्हें कॉल करके 

appointment नही लेना पड़ा ।

👍 हम एक अदभुत और 

सबसे समझदार पीढ़ी है क्योंकि 

हम अंतिम पीढ़ी हैं जो की 

अपने parents की सुनते हैं…

और 

साथ ही पहली पीढ़ी 

जो की 

अपने बच्चों की सुनते हैं । 

एक एेसा अन्तर जो किसी ने पोस्ट किया मुझे अच्छा लगा जो आप के साथ साझा कर रहा हू ।

-जीत……….!

सबसे समझदार पीढ़ी का स्वागत है सबसे पहले तो

वेलकम जीत!

आपकी पोस्ट पढ़ कर आपके पीढ़ी के बचपन को जीने का मन करता है। 

पर

आते ही आपने तो जंग की शुरुवात कर दी है यहां। सारी जेनेरेशन के रीडर्स हैं क्योंकि यहां।

हम अंतिम पीढ़ी हैं जो की 

अपने parents की सुनते हैं…

और 

साथ ही पहली पीढ़ी 

जो की 

अपने बच्चों की सुनते हैं । 

सचमुच जो बच्चों की सुनते हैं  वो शायद पहली पीढ़ी हैं आप पर आखरी जो मा बाप की सुनते है ये कहना शायद सहीं नहीं होगा क्योंकि आपकी बाद कि पीढ़ी की परवरिश आपने ही की है!

हैप्पी रीडिंग रीडर्स!

वन्स अगेन वेलकम जीत!

योर्स लविंग वारियर

नैना

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