क्या भूलूँ क्या याद करु मैं *Kya Bhulu Kya Yaad Karu Mai*


By Harivansh Rai ji Bacchan 💐

Picture : I clicked this…in last diwali season.

क्या भूलूँ, क्या याद करूँ मैं!

अगणित उन्मादों के क्षण हैं,

अगणित अवसादों के क्षण हैं,

रजनी की सूनी घड़ियों को किन-किन से आबाद करूँ मैं!

क्या भूलूँ, क्या याद करूँ मैं!

याद सुखों की आँसू लाती,दुख की, दिल भारी कर जाती,

दोष किसे दूँ जब अपने से अपने दिन बर्बाद करूँ मैं!

क्या भूलूँ, क्या याद करूँ मैं!

दोनों करके पछताता हूँ,सोच नहीं, पर मैं पाता हूँ,

सुधियों के बंधन से कैसे अपने को आज़ाद करूँ मैं!

क्या भूलूँ, क्या याद करूँ मैं!

Source : Wikipedia

Comment if you relate to this lines…If you can’t relate, there is a problem in your comprehension,It’s impossible.. everyone can relate…It’s about everyone…I am cent percent sure 👍

क्या भूलूं क्या याद करूँ हरिवंश राय बच्चन की बहुप्रशंसित आत्मकथा तथा हिन्दी साहित्य की एक कालजयी कृति है। यह चार खण्डों में हैः ‘क्या भूलूँ क्या याद करूँ’, नीड़ का निर्माण फिर’, ‘बसेरे से दूर’ और ‘दशद्वार से सोपान तक’। इसके लिए बच्चनजी को भारतीय साहित्य के सर्वोच्च पुरस्कार ‘सरस्वती सम्मान‘ से सम्मनित भी किया जा चुका है। हिन्दी प्रकाशनों में इस आत्मकथा का अत्यंत ऊचा स्थान है। (wikipedia)

My this blog is to remember him on his birth anniversary 27 November👍.

Happy reading Readers 👍

Stay inspired !

Stay blessed !

Yours loving warrior

Naina

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