आंखें कितनी भीगी हैं

यादें कितनी मीठी हैं आंखें कितनी भीगी हैं तुम्हारी बातें और ठहाकों के बिना हर शाम फीकी-फीकी है। भजनों में तो अब भी जान है कीर्तन की तो अब भी शान है पर तुम्हारे ठुमको के बीना सखी हर उत्सव के उत्साह की तो बात भी अधूरी-अधूरी है यादें कितनी मीठी हैं आंखे कितनी भीगी … Continue reading आंखें कितनी भीगी हैं