पापा जी

शब्द तो कम हैं, भाव इतने सारे हैं। जमीन,जहान और प्यार देने वाले,ग़लतियो पर तुरंत डाट कर सुधार देने वाले,डाट से तो अब भी बुरा लगता है,पर यही डाट ने दूनिया की हर बुराई से बचाया है,पिता बन कर पिता की कीमत और समझ पाते हैं,समझ कर सब आप कैसे नासमझ बन जाते हैं,सोच से … Continue reading पापा जी

आंखें कितनी भीगी हैं

यादें कितनी मीठी हैं आंखें कितनी भीगी हैं तुम्हारी बातें और ठहाकों के बिना हर शाम फीकी-फीकी है। भजनों में तो अब भी जान है कीर्तन की तो अब भी शान है पर तुम्हारे ठुमको के बीना सखी हर उत्सव के उत्साह की तो बात भी अधूरी-अधूरी है यादें कितनी मीठी हैं आंखे कितनी भीगी … Continue reading आंखें कितनी भीगी हैं