खोज

खो गई हूँ कहीं कश्मकश में ज़िंदगी की इस भगदड़ में क्या सोचा था और क्या हो चली हूँ किसी और के संग जीवन गढ़ने में कभी लगता है सब अच्छा है फिर एहसास होता है कि दिल तो अब भी बच्चा है कैसे निकलूँ इस झूठी दलदल से कभी कभी लगता है सब कुछ … Continue reading खोज