26/11/2008

Though the ink is blue But red was its colour For this is a saga of terror and valour All there was chaos Terror being everywhere people were on double Panic being set there Bullets buzzing around & about Found many on the target For 60 hrs all was blood and gore a scene no … Continue reading 26/11/2008

मेरी कामत के चर्चे शहर के हर कूचे में थे मकाँ, हमसे किसी के ऊँचे ना थे था ग़ुरूर हमको भी अपनी ज़रा नावाज़ी का अंज़ूमन में होते हैं चर्चे कहना था ख़बरसाजी का हुआ कुछ यूँ था उस दिन महफ़िल सजी एक ख़ास थी अंदर रंगिनिया थी और बाहर क़यामत-ए-बारिश की रात थी जुगलबंदी … Continue reading

मेरी कामत के चर्चे शहर के हर कूचे में थे मकाँ, हमसे किसी के ऊँचे ना थे था ग़ुरूर हमको भी अपनी ज़रा नावाज़ी का अंज़ूमन में होते हैं चर्चे कहना था ख़बरसाजी का हुआ कुछ यूँ था उस दिन महफ़िल सजी एक ख़ास थी अंदर रंगिनिया थी और बाहर क़यामत-ए-बारिश की रात थी जुगलबंदी … Continue reading