सजदा

हो के शर्मिन्दा गुनाहों से, कभी सर को झुका तो सही.. ये करेगा माफ़ तुझे, दो अश्क़ बहा तो सही.. न रहेगा तू मोहताज कभी किसी का, अरे नादान अपने हाथ उठा के दामन फैला तो सही...