भविष्य मेरे भारत का


सोचा था कि देश मेरा, ऐसा बनेगा,

सबसे महान् (जैसा था पहले), वैसा बनेगा।

मगर ये हरगिज़ ही न था ज़हन में,

के खुदा से बढ़कर ताकत और पैसा बनेगा।।

 

#सोचा था कि देश मेरा

फिर चिड़िया बनेगा सोने की,

ज़रूरत ही न होगी कभी

किसी भी जन को रोने की।।

 

#मेरे मुल्क में पूजी जाती है

मिट्टी भी कोने कोने की,

पर क्यों दरकार पड़ी इसे

कर्जे़ के पत्थर ढोने की।।

 

#कुछ लोग सियासत कर कर के

धमकी देते चुप होने की,

ज़रूरत क्या थी आख़िर इनको

नफ़रत के काँटे बोने की।।

 

#है वक्त अभी भी सम्भल जाओ

घड़ी है ये पाप धोने की,

है घड़ी ये प्रेम और प्रीत वाली

सुंदर सपने सन्जोने की।।

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