रिवाज़…


बिंदास घुमने वाली लड़की आज एक पिन लाने के लिए भी किसी की मोहताज हैं

क्या ऐसा ही तुम्हारा समाज है

शादी नहीं ये एक बेकार सा रिवाज़ है

हर कोई उसके दिल को छल जाता है

और पूरा परिवार जश्न मनाता है

नकली सी मुस्कराहट ले कर उसका मन भी घबराता है

तुम दूसरे घर से आई हो , हर पल इस बात का एहसास दिलाता है

एक आँगन रोता है और उसी पल दूसरा आँगन ख़ुशियाँ मनाता है

ना जाने कैसा रिवाज़ है ये शादी का
जहाँ दो परिवार ना एक होता हैं और ना ही अलग कहलता है

After a long break

Back with this….Many more to say but, unable to collect the words…!!!

Let me know.. what else you can add in this… And correct me if I am wrong…☺☺

Thanks & Regards

Virus_miki

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5 thoughts on “रिवाज़…

  1. I agree with your virus miki. Rishte sirf dikhawe ke liye jude ho to vah kutumb kaise. Bahu/ bhabhi/mami/chachi har roop mein stree ki buraai karo aur vo bas sehti rahe
    Itni nafrat ke baad sirf stree ki himmat aur sahan shakti ke kaaran ghar jude rehte hain

    Liked by 1 person

  2. अच्छी बातें पर यही रिवाज़ है जो कुटुंब कोPबांधे रखता है वरना पश्चिम में रिश्तों का मोल क्या है सबको पता है

    Liked by 1 person

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