माँ तुम बहुत याद आती हो…

आँखों के किनारे पर आ कर यूँ ही ठहर सी जाती हो, माँ तुम बहुत याद आती हो सुबह का अलार्म और रात की लोरी बन जाती हो , माँ तुम बहुत याद आती हो सर में दर्द हो तो मरहम और दिल में दर्द हो तो दुआ बन जाती हो, माँ तुम बहुत याद … Continue reading माँ तुम बहुत याद आती हो…

कलम से…

एक बेधड़क सी लड़की डर कर जीने लगी खाना तो क्या साँसे भी पूछ कर लेने लगी शिखर पर पहुँच कर फिर शून्य पर आ गई सुनी गलियों को अब वो यूँ ही निहारने लगी समझ नहीं आ रहा कि उसे ऐसे बंधन में क्यों बाँध दिया समाज के डर से उसके माता पिता ने … Continue reading कलम से…

रिवाज़…

बिंदास घुमने वाली लड़की आज एक पिन लाने के लिए भी किसी की मोहताज हैं क्या ऐसा ही तुम्हारा समाज है शादी नहीं ये एक बेकार सा रिवाज़ है हर कोई उसके दिल को छल जाता है और पूरा परिवार जश्न मनाता है नकली सी मुस्कराहट ले कर उसका मन भी घबराता है तुम दूसरे … Continue reading रिवाज़…