मुलाक़ात

निगाहो से होती थी वैसे तो गुफ़्तगू कैसे करें हाल-ए-बयाँ झुकी हों पलकें अगर इब्तिदा -ए – इश्क़ मे जो उड़ते थे अर्श पर इंतिहा में वो मिले फर्श पर अक्सर उस मर्ज़ का इलाज़ नहीं मौज़ूद तबीब ही देने वाला हो जिसका आज़ार गर भेजा था मज़मून कासिद से यूँ तो अशकों से धुल … Continue reading मुलाक़ात