कुछ गुस्ताखियां

कुछ गुस्ताखियां बस हो गई करनी तो नही थी दिल तुम्हारा दुखा पर हमने जानबूझ के की तो नही थी कुछ मनमानियां कुछ दिल की फरमाइशें दीमग की उधेड़ बिन नादान थी कुछ गुस्ताखियां शैतानी नहीं हालातो का परिणाम थी दिल में तुम हरदम ही खास रहे रोज़ाना बात हो न हो तुम ज़ज़्बातों में … Continue reading कुछ गुस्ताखियां