तेरे प्यार पर अब भी है इख्तियार उनका 💕

लबों पर आती थी बिन बुलाए मुस्कुराहट जो महफ़िल में ज़िक्र होता था उनका उन सोखियो -ए - तबस्सुम के मरासिम क्या बताएँ दिन अच्छा गुज़रता, गर दीदार होता था उनका बिछड़ना उनका हमारा कोई नई बात नहीं पास लाके दूर जाना दस्तूर है उनका ज़ोर-ए-आज़माइश बखूबी कर रहे हैं वो दिल गोया पत्थर हो … Continue reading तेरे प्यार पर अब भी है इख्तियार उनका 💕