फिर आज याद आए तुम

देखा जब बदलियों में छुपा सा चाँद कनखियों से निहारते नज़र आए तुम आज फिर याद आए तुम बीते बसंत कितने, कितनी बीतीं रातें सपनो से निकल ना पाएँ तुम आज फिर याद आए तुम ........ बाग़ में बैठा जाकर भूलने तुझे कली -ए-गुलाब में नज़र आए तुम आज फिर याद आए तुम .... भीगे … Continue reading फिर आज याद आए तुम