किरणे…आपके आफताब की


Happy reading!

Yours loving warrior

Naina

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27 thoughts on “किरणे…आपके आफताब की

  1. I am totally in ashushudha’s side…. It’s the beginning…. Naa kuch jhara hai… Na kuch zarega….

    Aur agr kuch gir gaya toh… Naya zarur lautega…!!!

    Just like spring season….

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  2. मिलके नित बढ़ते चलेंगे
    ” है बात ये उनके ख्वाब की
    है हमेशा संग हमारे
    ” किरणे आपके आफ़ताब की…… 🙏🙏

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      1. Bt u r the base

        इमारत कितनी भी ऊँची हो जावे
        महत्त्व नींव का सदा रहता है

        Thanks to U for being the “नींव” 🙏🙏🙏

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  3. बात बचपन में पढ़ी थी
    ” सुखों के जिस तालाब की”
    अब ये जाना, है संग हमारे
    ” किरणे उस (आपके) आफ़ताब की….”

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  4. होती ज़रूरत उनको नहीं कभी
    किसी दिखावे, किसी नक़ाब की
    रौशन हमेशा संग हैं जिनके
    किरणे आपके आफ़ताब की….

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  5. तो क्यों डरें और क्यों हम सहमें
    क्यों गफ़लत में पड़ जाएँ हम
    “अश्क के अनमोल मोती
    व्यर्थ क्यूँ बहाएँँ हम

    देंं खुशी हर एक जन को
    “वजह हम बनें मुस्कान की
    आगे रखें हम नेकियाँ ‘उनकी’
    “आख़िर ये बात है ‘उनकी’ शान की

    जान लो अब बातें पढ़ लो
    उनके दिल की उस किताब की
    है हमेशा जब संग हमारे
    ” ये किरणे, आपके आफ़ताब की…..
    है हमेशा संग हमारे
    ये किरणे आपके आफ़ताब की…..!!!

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  6. न झर रही, न झर चुकी है
    “पंखुड़ियाँ इस गुलाब की”
    तो क्या ज़रूरत है ऐ जानिब
    “इन ‘अश्कों के सैलाब’ की

    और जब साथ हैं हमारे’
    “ये किरणे आपके आफ़ताब की

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  7. यदि अनुमति हो तो मैं इसे अपने नज़रिये से लिखने का प्रयास करुँ…
    यदि अनुमति हो तो….🙏🙏

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  8. देखो आप ही की बात से स्पष्ट है कि
    झर जाने के बाद भी लगातार झर रही हैं
    पंखुड़ियाँँ गुलाब की

    तो इसका तो यही अर्थ हुआ न कि ये गुलाब झर कर भी पूरा नहीं झरा है
    मतलब कि ये कभी समाप्त हो ही नहीं सकता हमारे लिए ( अपने अपनों के लिए)
    सही है न…..

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  9. बस बची हैं तो अब किरणें
    आपके आफ़ताब की

    क्या सच में ऐसा है…..??
    यदि ना , तो फ़िर ये अश्कों की लड़ियाँ किसलिए
    यदि हाँ तो फ़िर ये बात क्यों

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