अगर मखमली बदलो पर घर होते,तो मतलबी कहाँ हम होते ।


अगर मखमली बदलो पर घर होते

तो मतलबी कहाँ हम होते

रेशमी धूप के संग मुफ्त में मुस्कुरा लेते

तारो के साथ मुफ्त में जी भर के चमचमा लेते

फिर कहाँ मतलबी सड़को पे

 ट्राफिक के साथ दिल जला रे होते

मखमली ख्वाब मखमली दुनिया में सजा रे होते

अगर बादलो पे घर होते

बेमतलब ही हम तुम्हे रिझा रे होते

मतलबी हम तुम 

बेमतलब के मतलब गा रे होते

ज़मीनी हकीकत को भी हम हँसा लेते

और तुमको तो बस बातों में ही हम फसा लेते

बेमतलब ही तुमसे सारी बदमाशियाँ करा लेते

थोड़ा तुम थोड़ा हम शर्मा लेते

फिर थक कर मखमली चादरों पे 

मासूम पैर फैला रे होते

मतलबी नहीं 

मान-सम्मान, अपमान वाली भी नहीं

बेमतलब की बेमिसाल यादे सजा लेते

बादलो पे घर काश हम बसा लेते

Happy reading!

Yours loving warrior

Naina

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7 thoughts on “अगर मखमली बदलो पर घर होते,तो मतलबी कहाँ हम होते ।

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