मूक…


माना की मैं नहीं कह सकती ,पर मेरे भी अलफ़ाज़ है

ज़ुबान नहीं है मेरी, पर भावना तो मेरे साथ है 

मुझे भी अभिव्यक्त होना है

शब्द ना सहीं पर आँखे, हाथ और जुबां का एहसास है

तुम्हारे स्पर्ष को भली भांति समझती हूँ

अच्छा एवं बुरे का फर्क भी पहचानती हूँ

मूक बधिर समझ कर इस्तेमाल ना करो मेरा

आवाज़ नहीं है तो क्या, मन से विचार तो बुनती हूँ 

ईच्छायें मेरी भी अपार है

सपनो का मन में गुब्बार है

धुन और सरगम नहीं है तो क्या

शब्दों का मायाजाल मेरे साथ हरबार है

पढ़ना-लिखना, खेलना-कूदना, घूमना-फिरना सजना सवरना ,… निपूणता सभी में हासिल है

हवा के साथ उड़ना, प्राकृति से बातें करना,… कोई यहाँ ना इन सब में मेरे काबिल है

सिर्फ एक तोहफा जो भगवान् ने मुझे दिया, इस दुनियां ने मुझे छोड़ दिया

फिर भी मुस्कुरा कर आगे बढ़ रही हूँ ये हौसला ही मेरा साहिल है ।

An effort to think from someone else view… Though I have never seen or confront such person ever in my life… But I just tried this version.. Hope I am able to do justice with ….

   ~virus_miki

Do let me know if I need to improve or I was to the mark.. Thanks & Regards….

Something similar I have writen few days back …Have a read miki… Following is the link :

How exactly should humans speak ?

सिर्फ एक तोहफा जो भगवान् ने मुझे दिया, इस दुनियां ने मुझे छोड़ दिया

फिर भी मुस्कुरा कर आगे बढ़ रही हूँ ये हौसला ही मेरा साहिल है ।

These lines connect to the courage such people gather..👏

Well writen dear..Keep scribbling

Yours loving warrior

Naina

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11 thoughts on “मूक…

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