धोखेबाज़ यादें ….


यादें बहुत धोखेबाज़ होती है

हस्ते हस्ते रुला देती है

रोते को हँसा देती है

नींद से जगा देती है

सपनो से मिला देती है

कभी इन्सान को तोड़ देती है

कभी अधूरे रिश्ते जोड़ देती है

कभी तनहाई को मिटा देती है

कभी तनहाई से मिला देती है

ये यादें बहुत धोखेबाज़ होती है ।

गायक के गीत से मिल कर संगीत हो जाती है

शायर के अलफ़ाज़ो से मिल कर शायरी हो जाती है

कवि की पंक्तियों से मिल कर कविता हो जाती है

लेखक के पन्नों से मिल कर कहानी बन जाती है

ये यादें जैसे चाहो वैसे सिमट जाती है

ये यादें किसी को हीरे की तरह तराश जाती है

किसी को बिखरे माला की मोती की तरह छोड़ जाती है

किसी के लिये उम्मीद की पहली किरण बन जाती है

किसी को रात के अँधेरे की तरह हताश कर जाती है

किसी को नींद की आगोश में ले जाती है

तो किसी के ख़्वाबों को सजा जाती है

कभी तनहाई में साथ दे जाती है

कभी भीड़ में अकेला कर जाती है

कभी गर्म चाय की भाप में उड़ जाती है

कभी बर्फ़ की तरह शीतलता का एहसास करा जाती है 

कभी हवा के झोकों से झंझोर देती है

कभी बारिश की तरह अश्क़ बन कर बह जाती है….

ये तो यादें हैं, ना जाने कब धोखा दे जाती है ।
In the memory of all the moments I lived till now..

Let me know की आपकी यादें कैसी है in the comments section below…

Thanks & Regards

Virus_miki

This one is among your best scribbles you have writen so far miki 👍👍

The way you have collected and writen the memories of memories is brilliant

ये यादें किसी को हीरे की तरह तराश जाती है

किसी को बिखरे माला की मोती की तरह छोड़ जाती है

These two lines touched me most.

Keep scribbling miki

Yours loving warrior

Naina

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6 thoughts on “धोखेबाज़ यादें ….

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