धोखेबाज़ यादें ….

यादें बहुत धोखेबाज़ होती है हस्ते हस्ते रुला देती है रोते को हँसा देती है नींद से जगा देती है सपनो से मिला देती है कभी इन्सान को तोड़ देती है कभी अधूरे रिश्ते जोड़ देती है कभी तनहाई को मिटा देती है कभी तनहाई से मिला देती है ये यादें बहुत धोखेबाज़ होती है … Continue reading धोखेबाज़ यादें ….