तेरी आँखों से डर लगता है

तेरी आँखों से डर लगता है दिल के राज़ पढ़ लेती हैं  तेरी डरावनी आँखे क्योकि😉😆 इसलिए तेरी आँखो डर लगता है जैसे भी हैं हम दोनों  लड़ते हैं झगड़ते हैं पर दिल से साथ भी एक दूसरे के  हरदम रहते हैं इसलिए हम दोनो  माने या न माने  हमारा रिश्ता गहरा लगता है पिछले … Continue reading तेरी आँखों से डर लगता है

खोज

खोज की सोच नहीं होती बस चाहत होती है दरवाज़ा खुला हो या बंद हो,चाह हो समझने की तो दरवाजे के पास आहट ज़रूर होती है खाली मत महसूस कर, ये खोज के रोज़ हैं बीत न जाये,खोज के बिना,नहीं तो बस अफसोस है खोज की चाह खुद की सबसे बड़ी दोस्त है खुद से … Continue reading खोज

मज़बूरी

ख्वाइशें अधूरी हैं,क्योंकि मज़बुरी है मजबूरियां तुम्हारी,हमको सारी, सारी की सारी समझ आ गई  पर क्या तुम्हें हमारी  तुमको आसानी से समझ जाने की ये आदत  पसंद आ गयी ? (@^^)/~~~ Happy reading ! This is the commonest scenario I have "observed" between many couples and infact also in other relationships also...where demands when go … Continue reading मज़बूरी

Free lunch is a myth !

"Free lunch" we often hear this term but free lunchs are myth,they don't exist in reality but thing is that...should they even exist? Can you digest if someone gets something for free? Somewhere your heart will say "No" and "Yes" both. Well in that mayhem what my heart speaks is this that.... It's all give … Continue reading Free lunch is a myth !

बेदाग 

कांच के तरह चरित्र गांगा जल की तरह पवित्र ऐसा व्यक्तित्व जो दिलों को छू गया इस भारत के मिसाइल मैन की प्रेरणा में भारत का हर बच्चा खो गया बेदाग व्यक्तित्व जिसपे कभी कैसे भी धब्बे नही दिखे इसलिए शायद खुदा भी आप पर मेहरबान दिखे आखरी वक्त भी शानदार उन्होंने आपको दिए दर्द … Continue reading बेदाग 

अगर मखमली बदलो पर घर होते,तो मतलबी कहाँ हम होते ।

अगर मखमली बदलो पर घर होते तो मतलबी कहाँ हम होते रेशमी धूप के संग मुफ्त में मुस्कुरा लेते तारो के साथ मुफ्त में जी भर के चमचमा लेते फिर कहाँ मतलबी सड़को पे  ट्राफिक के साथ दिल जला रे होते मखमली ख्वाब मखमली दुनिया में सजा रे होते अगर बादलो पे घर होते बेमतलब … Continue reading अगर मखमली बदलो पर घर होते,तो मतलबी कहाँ हम होते ।

सुकून वाली सांस हो

खामोशी तुम,मदहोशी तुम, ताकत तुम,अंदाज़ तुम, तुम ही तो साज़ हो, अल्फ़ाज़ भी तुम, दवात भी तुम, लिख रहीं हु जो,  तुम वही मेरी किताब हो, तुम ज़िन्दगी नहीँ हो मेरी,  तुम सी सरल होती काश, पेचीदा है ये ज़िन्दगी, इसीलिये ज़िन्दगी नहीं तुम तुम तो बिल्कुल सरल, हवाओ की तरह तुम तो बस मेरी … Continue reading सुकून वाली सांस हो