Helpless…!!!


Worst feeling of life~

“Seeing your parents growing older and you are helpless”

चलना सिखाया था जिन्होंने कभी आज देख रही हूँ उनके कदम डगमगाते हुए ,

देखा है मैंने माँ – पिता को अचानक बदलते हुए ।

सामान को सलामत रखना सीखा था जिनसे…, आज देख रही हूँ उन्हें अपने चश्मे के लिए पूरा घर सर पे उठाते हुए 

देखा है मैंने माँ – पिता को अचानक बदलते हुए ।

जो मुझे एक छिक आने पर डॉक्टर के पास दौड़ जाते थे, आज देख रही हूँ डॉक्टर को लुटेरा बता कर ऑपरेशन को टालते हुए 

देखा है मैंने माँ – पिता को अचानक बदलते हुए ।

जिनसे सीखा था कभी साईकल और गाड़ी चलाना आज देख रही हूँ उन्हें कतराता पैदल चलते हुए  

देखा है मैंने माँ – पिता को अचानक बदलते हुए ।

जो कभी मुझ पर गुस्सा नहीं करते थे आज देख रही हूँ उन्हें, छोटी छोटी बातों पर चीड़ चीड़ करते हुए …..

देखा है मैंने माँ – पिता को अचानक बदलते हुए ।

घूमने का शौक था जिन्हें कभी , आज देख रही हूँ उन्हें घर पे अकेले बैठे हुए 

देखा है मैंने माँ – पिता को अचानक बदलते हुए ।

सारा दिन काम करने के बाद मुझसे हस कर मिलते थे, आज देख रही हूँ उन्हें अपने बुढ़ापे की थकान छुपाते हुए 

देखा है मैंने माँ – पिता को अचानक बदलते हुए ।

सहारा दिया था गिरते वक़्त मुझे कभी, आज देख रही हूँ उन्हें लाठी का सहारा लेते हुए

देखा है मैंने माँ – पिता को अचानक बदलते हुए ।

निर्भीक हो कर चलना सीखा था कभी जिनसे , देख रही हूँ उन्हें किसी की मौत की खबर सुन कर घबराते हुए 

देखा है मैंने माँ – पिता को अचानक बदलते हुए ।

This one really creates goose bumps miki…I don’t know if I can comment on this.

Bt these are the people who never want us to feel helpless,so don’t..they can now feel all the positives only seeing you😙😙

Stay blessed miki

Happy reading readers 

Yours loving warrior 

Naina

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15 thoughts on “Helpless…!!!

  1. Very well written Miki and helpless we may feel sometimes, but it is a gentle reminder of the God to us reminding us of our duties towards our parents. Thanks for sharing such a wonderful poem

    Liked by 2 people

  2. बदलते नही है माता पिता कभी
    उम्र और समय बदल जाता है
    जिस जगह पे हम बचपन मे थे आज पापा वहा है
    आज जहा पापा है वहाँ हम थे
    बचपन मे हमारा अनावश्यक रोने पे कभी न चिरचिरते थे
    आज उनके अनावश्यक चिरचिरने पर कभी नही रोना चाहिये
    बदले वो नही समय बदला है
    हमको भी समय के साथ बचपन से बाहर आना पड़ता है तो असमान्य बी सामान्य लगता है

    मकान घर उस समय बनता है जब उसमे एक ही बड़ा हो
    वो लोग किस्मत वाले होते है जिनके बड़े हाने पर
    पापा अपने बचपन मे चले जाते है
    नही तो दो बड़े होने से घर मकान हो जाता है
    U r lucky

    Liked by 3 people

    1. बिलकुल नये रूप में आप की सोच मिली
      और सच है समय के साथ सब बदलता है । बदले वो नहीं समय बदला है ।

      पर एक ही बड़ा हो इसमें मेरे विचार थोड़े भिन्न हैं
      मुझे लगता है घर तब बनता है जब सभी एक दूसरे के विचार का सम्मान करें ।
      वहाँ कितने बड़े और कितने छोटे हैं उससे नहीं
      कई बार छोटे बच्चे भी बड़ी बात सीखा जाते हैं ।

      विचारों का आदान प्रदान
      एक दूसरे का सम्मान
      और
      सही गलत की पहचान
      होनी चाहिए घर में ।

      Liked by 1 person

  3. भावनाये झकझोर ती है तो दिल यही बोलता है। लेगे रहो कलम रूकने न पाय

    Liked by 3 people

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