उसने मुझे जीना सिखया 


उसने मुझे जीना सीखाया दर्द भुलाकर बढ़ना सिखाया

कीचड़ में सना था मैं हाथ देकर उसने निकाला और  हाथ मे क़लम  पकड़ना सिखाया

मेरी आँखों मे थे अंगारे और उसे खूब चिल्लाया 

साफ न किये मेरे कीचड़ और मेरे हाथ मे कलम  थमाया

उसकी आँखों मे थे आँसू और होटो पे मुस्कुराहट 

फिर बी मेरी समझ न आया कि उसने क्यों कलम थमाया

जब लिखा तो समझ आया मन के अंदर के कीचड़ का कलम ने किया सफाया

अब समझ आया तूने क्यों कलम थमाया 
अब जीना आया 

    ~Rancho

    Kalam mein vo jaado hai jo aasun ko kavitao mein badal ke muskurahat aur talliyoon ki gadgadahat mein badal deti hai. Aapki kavita un taliyoo k layak hai rancho👏👏👏.

    yaha sabko aap tough competition denge.

    Keep scribbling Rancho!

    Happy reading readers

    Yours loving warrior

    Naina

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    4 thoughts on “उसने मुझे जीना सिखया 

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