चिराग़ कयी झिलमिलाएँगे 

मैं शाम अक्सर हारे बैठ जाता हूँ सुबह की तलाश में। मैं रोज़ जाम कयी ख़त्म कर जाता हूँ, एक अनजानी सी प्यास में।  हूँ मुख़ातिब हर बुराई से जहाँ की पर मयस्सर मैं हो जाता हूँ अच्छाई के ख़्वाब से। यूँ तो हूँ शांत एक बूझी हुई लौ के धूँए सा मैं इस अंधेरे … Continue reading चिराग़ कयी झिलमिलाएँगे 

About wound that tounge can make says Thiruvalluar

  Thiruvalluar is an author and poet from Sangam period. Read more about him : wikipedia link Its so much important to be wordly wise.My earlier posts Also say the same. Why humans speak? How exactly should humans speak? काश मैं कभी गलत बोल नहीं पाती I am making these posts so that  I become someone with … Continue reading About wound that tounge can make says Thiruvalluar