शहर है मेरा भी 


मैं बूझते उजाले की लौ बन बैठूँगा मैं तेरी वादियों की तनहैयाँ दूर तक समेटूँगा। 
कल गर क़ाबिल हुआ तो ही वापिस लौटूँगा

तेरा ज़र्रा समेटे जिंदिगी की दौड़ दौड़ूँगा। 
चाहे क़ाबिज़ जहाँ हो जाऊँ आशियाँना तू होगा, 

मकान चाहे जहाँ बनाऊँ मेरा घर तू होगा। 
रंग चाहे जहाँ का चढ़ाऊँ मिट्टी मेरी तू होगा, 

कल वापिस भले ना आऊँ मुझमें ज़िंदा तू होगा। 
चल मेरी कामयाबी की अब दुआ कर मेरे शहर

माँ के बाद तेरी ही दुआ में है वो असर। 
तू भीतर मेरे साथ, तो आसान होगा ये सफ़र

तेरे पानी की मिठास लिए पी लूँगा हर ज़हर। 
तेरी याद कुछ धूँधली जो हुई आँखे नम सी लगी, रोया नहीं मैं पर हसरत जो लौट आने की फिर से जगी। 
तेरी हवा जो साथ देगी जल्द कुछ कर दिखाऊँगा, 

मैं बाशिंदा तेरा, टूटूँगा ना किसी डर से बस जल्द. लौट आऊँगा।

-Itzwhisperer (रजत)

After reading this I am sure everyone will be reminded of their hometowns.All of us have to migrate for some reason at some point of life.

Education 

Job

Marriage (specially girls )

And many more reasons can be.

Worst one as the refugee.

But the place where you have spent your childhood remains dearer forever and has no replacement.

Awesome one Mr. Whisperer!

And welcome to our place…finally you have made your first whishper here and it is great one.

Keep scribbling whisperer!

Happy reading readers!

Yours loving warrior

NAINA

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2 thoughts on “शहर है मेरा भी 

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